देवरिया: हड्डियों से जुड़ी बीमारियों में अब एक नई चुनौती बनकर सामने आ रही है — एवस्कुलर नेक्रोसिस ऑफ फीमोरल हेड (Avascular Necrosis of Femoral Head)। यह रोग धीरे-धीरे कूल्हे की हड्डी को खत्म कर देता है और मरीज को चलने-फिरने से लाचार कर देता है। पहले यह बीमारी वृद्धों में देखी जाती थी, लेकिन अब 25 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं में भी तेजी से फैल रही है।
इस विषय पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के जाने-माने ऑर्थोपेडिक व स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा ने विस्तार से बातचीत की और बताया कि यह बीमारी कैसे बढ़ रही है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
क्या है एवस्कुलर नेक्रोसिस?
डॉ. एस. के. शर्मा बताते हैं,
“एवस्कुलर नेक्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें जांघ की हड्डी के ऊपरी हिस्से यानी फीमर हेड तक खून का प्रवाह रुक जाता है। रक्त की कमी के कारण उस हिस्से की हड्डी मरने लगती है। धीरे-धीरे हड्डी कमजोर होकर धंसने लगती है और जोड़ अपना आकार खो देता है। अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो मरीज चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है।
” किन कारणों से होता है यह रोग?
डॉ. शर्मा के अनुसार, इस बीमारी के कई प्रमुख कारण हैं —
- स्टेरॉयड का लंबे समय तक सेवन – यह हड्डियों में रक्त प्रवाह को बाधित करता है।
- अत्यधिक शराब का सेवन – हड्डी के ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोकता है।
- चोट या फ्रैक्चर – खासकर फीमर हेड के पास चोट लगने से खून की नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
- रक्त विकार जैसे सिकल सेल एनीमिया – रक्त का गाढ़ापन बढ़ने से प्रवाह बाधित होता है।
- कोविड संक्रमण के बाद स्टेरॉयड थेरेपी – कोविड के दौरान अनियंत्रित स्टेरॉयड उपयोग के कारण अब कई मरीजों में AVN के मामले सामने आ रहे हैं।
- प्रमुख लक्षण – कैसे पहचानें?
- कूल्हे, जांघ या कमर में दर्द जो शुरुआत में हल्का रहता है पर धीरे-धीरे बढ़ता है।
- चलते या सीढ़ी चढ़ते समय दर्द का बढ़ना।
- लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने पर तकलीफ।
- जोड़ में जकड़न और लंगड़ाहट।
- रात में या ठंड के मौसम में दर्द का तेज होना।
डॉ. शर्मा कहते हैं —
“कई बार मरीज इसे सामान्य ‘साइटिका’ या ‘कमर दर्द’ समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह कूल्हे की हड्डी के खराब होने की शुरुआती निशानी होती है।”
कैसे होती है जांच?
डॉ. शर्मा के अनुसार, सही जांच समय रहते होना जरूरी है —
- MRI स्कैन: यह शुरुआती अवस्था में AVN का पता लगाने का सबसे संवेदनशील तरीका है।
- X-ray: इससे हड्डी के धंसने या उसके आकार में बदलाव की पुष्टि होती है।
- BMD (Bone Mineral Density) टेस्ट: हड्डियों की मजबूती का आकलन करता है।
- विटामिन D और B12 जांच: हड्डियों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य को दर्शाती है।
डॉ. शर्मा बताते हैं कि इलाज बीमारी के स्टेज (Stage) पर निर्भर करता है —
प्रारंभिक अवस्था (Stage I–II):
- दवाओं से इलाज:
कैल्शियम, विटामिन D3 और बी12 की कमी पूरी की जाती है। - Core Decompression Surgery:
इसमें फीमर हेड के भीतर से दबाव हटाकर रक्त प्रवाह को बढ़ाया जाता है ताकि नई रक्त वाहिकाएं बन सकें। - Stem Cell Therapy या PRP Therapy:
यह तकनीक हड्डी के ऊतकों को फिर से जीवित करने में मदद करती है।
अंतिम अवस्था (Stage III–IV):
- Total Hip Replacement (THR):
जब हड्डी पूरी तरह धंस जाती है, तब जोड़ को बदलने की सर्जरी की जाती है, जिससे मरीज फिर से सामान्य जीवन जी सके।
डॉ. एस. के. शर्मा की सलाह है कि इस बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ी रोकथाम है —
- बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड का उपयोग न करें।
- शराब और धूम्रपान से दूरी रखें।
- विटामिन D और B12 की नियमित जांच करवाएं।
- हड्डी के दर्द को नजरअंदाज न करें।
- नियमित व्यायाम करें और रोजाना कुछ समय धूप में बिताएं।
- हड्डियों की जांच जैसे बीएमडी टेस्ट हर वर्ष अवश्य कराएं।
“एवस्कुलर नेक्रोसिस एक गंभीर लेकिन शुरुआती अवस्था में ठीक होने वाली बीमारी है।
अगर दर्द लगातार बना रहे, तो जल्द से जल्द ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच कराएं।
देरी करने पर जोड़ की हड्डी धंस सकती है और फिर केवल रिप्लेसमेंट ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।”
एवस्कुलर नेक्रोसिस अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, बल्कि यह युवाओं में भी बढ़ रही है।
अनियंत्रित स्टेरॉयड सेवन, गलत जीवनशैली और पौष्टिक तत्वों की कमी इसकी जड़ में हैं।
समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से इस बीमारी को पूरी तरह रोका जा सकता है।
डॉ. एस. के. शर्मा हर महीने देवरिया बोन जॉइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर न्यू कॉलोनी गुरूद्वारे के समीप नियर आईसीआईसीआई बैंक के समीप निशुल्क हड्डी जांच शिविर का आयोजन भी करते हैं, जहां मरीजों को बीएमडी, विटामिन D और B12 जांच नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इससे हड्डी रोगों का समय पर पता लगाकर उचित इलाज संभव हो पाता है।



