रिपोर्ट: सत्य प्रकाश तिवारी
देवरिया:तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी और बदलती जीवनशैली में आजकल हर व्यक्ति कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल पर घंटों काम करता है। यह डिजिटल युग हमारी तकनीकी प्रगति का प्रतीक तो है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव अब हमारे शरीर पर साफ दिखने लगे हैं। खासतौर पर युवाओं और ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों में गर्दन, पीठ और कमर दर्द की शिकायत तेजी से बढ़ी है।
देवरिया के प्रसिद्ध ऑर्थो व स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा (एम.एस. ऑर्थो, केजीएमयू लखनऊ) बताते हैं कि ऐसी जीवनशैली से पैदा होने वाली सबसे आम और खतरनाक बीमारी है “स्पॉन्डिलाइटिस (Spondylitis)”, जो अगर समय रहते नहीं संभाली गई, तो यह स्थायी विकलांगता तक पहुंचा सकती है।
क्या है स्पॉन्डिलाइटिस?
डॉ. शर्मा के अनुसार, “स्पॉन्डिलाइटिस” एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी (Spine) में सूजन, दर्द और अकड़न होती है।यह बीमारी तब शुरू होती है जब स्पाइन की हड्डियों को जोड़ने वाली डिस्क या मांसपेशियां लगातार दबाव में रहती हैं।लंबे समय तक गलत पॉश्चर में बैठना, तनाव लेना या शारीरिक गतिविधि की कमी इस रोग को जन्म देती है।
यह रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है —
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सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस (Cervical Spondylitis):
यह गर्दन और कंधे के आसपास की नसों को प्रभावित करता है। -
लम्बर स्पॉन्डिलाइटिस (Lumbar Spondylitis):
इसमें कमर और रीढ़ के निचले हिस्से में दर्द और सूजन होती है!
डॉ. शर्मा ने बताया कि स्पॉन्डिलाइटिस अब किसी उम्र विशेष की बीमारी नहीं रही। पहले यह 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में दिखती थी, लेकिन अब यह 25–35 वर्ष के युवाओं में भी आम हो चुकी है। इसके कुछ प्रमुख कारण हैं —
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लगातार कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करना:
लंबे समय तक झुककर स्क्रीन देखना गर्दन की नसों पर दबाव डालता है, जिससे दर्द शुरू होता है। -
एक ही पोजीशन में बैठना:
जब शरीर घंटों तक एक अवस्था में रहता है, तो रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और स्पाइन पर दवाब बढ़ता है। -
तनाव और मानसिक दबाव:
मानसिक तनाव से मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे सूजन और अकड़न होती है। -
गलत खानपान:
विटामिन B12, D3 और कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं। जंक फूड, तली चीज़ें और शराब भी इसमें योगदान देती हैं। -
व्यायाम की कमी:
आजकल लोग एक्सरसाइज या योग करने से बचते हैं, जिससे शरीर की लचीलापन घट जाती है। स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण – पहचानें समय रहते
डॉ. शर्मा कहते हैं कि अगर मरीज कुछ शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लें, तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। ये प्रमुख लक्षण हैं —
- सुबह उठने पर गर्दन या कमर में जकड़न
- लंबे समय बैठने के बाद दर्द बढ़ना
- सिर घुमाने या झुकाने पर तकलीफ
- पीठ में भारीपन या झनझनाहट महसूस होना
- हाथ-पैरों में सुन्नपन
- बार-बार सिरदर्द या चक्कर आना
यदि ये लक्षण तीन महीने से अधिक बने रहें, तो तुरंत ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन से परामर्श आवश्यक है।
बीमारी बढ़ने पर क्या होता है?
डॉ. शर्मा बताते हैं कि जब यह रोग बढ़ता है तो स्पाइन की डिस्क सिकुड़ने लगती है।
यह धीरे-धीरे नसों पर दबाव डालने लगती है, जिससे दर्द नीचे हाथों या पैरों तक पहुंच जाता है।
कई मामलों में यह स्थिति “स्लिप डिस्क” में भी बदल जाती है।
यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो रोगी की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी (Spinal Deformity) हो सकती है, जिससे चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है।
डॉ. शर्मा द्वारा सुझाए गए बचाव के उपाय
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सही पॉश्चर रखें:
कुर्सी पर सीधा बैठें, रीढ़ को झुकने न दें।
कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के समानांतर होनी चाहिए। -
हर आधे घंटे बाद ब्रेक लें:
थोड़ा चलें, स्ट्रेच करें और गहरी सांस लें। -
योग और एक्सरसाइज करें:
डॉ. शर्मा बताते हैं कि भुजंगासन, ताड़ासन, शलभासन, और सर्वांगासन जैसी मुद्राएं बेहद लाभकारी हैं। -
खानपान पर ध्यान दें:
दूध, पनीर, सोया, अंडा, बादाम और हरी सब्जियों को आहार में शामिल करें।
जंक फूड और अत्यधिक तेलयुक्त भोजन से बचें। -
तनाव न लें:
मानसिक शांति के लिए ध्यान (Meditation) और पर्याप्त नींद जरूरी है। -
विटामिन डी और बी12 की जांच करवाएं:
सूर्य की रोशनी में कुछ देर रहना फायदेमंद है।
इलाज के आधुनिक तरीके
देवरिया बोन, जॉइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर में डॉ. शर्मा और उनकी टीम द्वारा कई आधुनिक इलाज पद्धतियां अपनाई जाती हैं:
- फिजियोथेरेपी और ट्रैक्शन थैरेपी
- लेजर थैरेपी और मसल रिलीफ तकनीक
- इंजेक्शन बेस्ड सूजन नियंत्रण उपचार
- एडवांस न्यूरो और स्पाइन सर्जरी (जटिल मामलों में)
- विटामिन और हार्मोन बैलेंस थेरेपी
डॉ. शर्मा का कहना है, “हर स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज सर्जरी नहीं होता। ज़्यादातर मामलों में दवा, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली सुधार से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।”
देवरिया बोन, जॉइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर की विशेषता
यह केंद्र देवरिया में हड्डी और स्पाइन रोगों के इलाज का सबसे भरोसेमंद स्थान बन चुका है।
केजीएमयू लखनऊ से प्रशिक्षित डॉ. एस. के. शर्मा यहां मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
केंद्र की प्रमुख सेवाएं:
- स्पाइन सर्जरी एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट
- फ्रैक्चर एवं हड्डी रोगों का उपचार
- निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर
- विटामिन बी12, डी3 एवं बीएमडी जांच
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत निःशुल्क इलाज
डॉ. शर्मा का संदेश
डॉ. एस. के. शर्मा का कहना है —
“रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन जब हम अपनी जीवनशैली में अनुशासन नहीं रखते, तो वही ताकत कमजोरी में बदल जाती है।
यदि आप बार-बार गर्दन या कमर दर्द महसूस करते हैं, तो दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर न रहें, बल्कि कारण खोजें और सही विशेषज्ञ से परामर्श लें।”
जनजागरूकता की मुहिम
देवरिया बोन, जॉइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर द्वारा समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
इनमें मरीजों की बीएमडी, विटामिन बी12 और डी3 जांचें की जाती हैं तथा उन्हें रीढ़ की बीमारियों से बचाव के तरीके बताए जाते हैं।
डॉ. शर्मा का यह मानना है कि —
“बीमारी से बड़ा इलाज नहीं, बल्कि बचाव ही सबसे बड़ी चिकित्सा है।”
रोजमर्रा की ज़िंदगी में अपनाएं ये छोटे बदलाव
- झुककर मोबाइल न देखें, स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें।
- नींद का समय 7–8 घंटे रखें।
- मोटापा नियंत्रित करें, क्योंकि अधिक वजन से स्पाइन पर दबाव बढ़ता है।
- ड्राइविंग करते समय सीट सीधी रखें।
- भारी सामान उठाते वक्त झुकने के बजाय घुटनों को मोड़ें।
केंद्र का पता व संपर्क जानकारी:
देवरिया बोन, जॉइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर
📍स्थान – गुरु द्वारा के पीछे, डॉ. स्कैन के पास, न्यू कॉलोनी, देवरिया (उत्तर प्रदेश)
📞 संपर्क – 7307670765, 9415503012
🕐 OPD समय – सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक (रविवार बंद)
स्पॉन्डिलाइटिस आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी की एक आम लेकिन खतरनाक बीमारी बन चुकी है।
इसका मुख्य कारण हमारी गलत जीवनशैली, कंप्यूटर पर लगातार काम, तनाव और विटामिन की कमी है।
देवरिया के प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा का कहना है कि समय रहते जांच और सही इलाज अपनाने से यह बीमारी पूरी तरह नियंत्रित की जा सकती है।
इसलिए अगर आपकी रीढ़, गर्दन या कमर में लगातार दर्द या अकड़न है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
डॉ. शर्मा जैसे विशेषज्ञ की सलाह लें, योग करें, पौष्टिक आहार अपनाएं और अपने जीवन में “स्पाइन हेल्थ” को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

