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Club Foot: बच्चों में टेढ़े पैर की पहचान और इलाज अब आसान – केजीएमयू के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डॉ. एस.के. शर्मा ने बताया, समय रहते इलाज से बच्चे चल सकते हैं सामान्य

देवरिया: बच्चा जन्म लेते ही माता-पिता के लिए सबसे बड़ी खुशी लेकर आता है, लेकिन अगर उस बच्चे के पैर टेढ़े-मेढ़े या उलटे दिखें, तो परिवार में चिंता छा जाती है। ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे “भगवान की मर्जी” या “गर्भ में गलत स्थिति” का परिणाम मानते हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान कहता है कि यह एक इलाज योग्य विकार है, जिसे “Club Foot” (क्लब फुट) कहा जाता है।


किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डॉ. एस.के. शर्मा ने इस विषय पर विस्तार से बताया कि यदि इसका इलाज जन्म के कुछ हफ्तों में शुरू कर दिया जाए, तो बच्चा बिल्कुल सामान्य पैर लेकर चल सकता है, दौड़ सकता है और जीवनभर कोई परेशानी नहीं होती।

 

क्या है Club Foot (क्लब फुट)?

डॉ. शर्मा बताते हैं कि Club Foot एक जन्मजात विकार (Congenital Deformity) है जिसमें बच्चे का पैर अंदर की ओर या नीचे की दिशा में मुड़ जाता है। और यह मुड़ाव इतना गहरा होता है कि बच्चा सामान्य तरीके से पैर नहीं रख पाता। कभी-कभी दोनों पैर प्रभावित होते हैं, कभी केवल एक पैर। जिसे मेडिकल भाषा में इसे Congenital Talipes Equinovarus (CTEV) कहते है और आम बोलचाल में इसे टेढ़ा पैर या उल्टा पैर बोलते है।



जानें यह समस्या कितनी आम है?

दरअसल आपको बताते चले कि भारत में हर 1000 नवजात बच्चों में से लगभग 1 बच्चा Club Foot से प्रभावित होता है। और यह आंकड़ा ग्रामीण इलाकों में अधिक है, जहां समय पर पहचान और इलाज की सुविधा कम होती है।

डॉ. एस के शर्मा बताते हैं कि –“यह समस्या जन्म से होती है, लेकिन इसका समय पर इलाज करने पर बच्चा बिल्कुल सामान्य चल सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता इसे जल्द पहचानें और डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।”


जानें Club Foot के मुख्य लक्षण

बच्चे का पैर अंदर या नीचे की ओर मुड़ा हुआ दिखे।

एड़ी ऊपर उठी हुई लगती है।

पैर का तलवा उल्टा या आड़ा दिखाई देता है।

एक पैर दूसरे से छोटा या पतला दिख सकता है।

अगर इलाज न किया जाए, तो बच्चा चलने में लंगड़ाने लगता है।


Club Foot के कारण – डॉ. शर्मा की व्याख्या

डॉ. शर्मा के अनुसार, इसके सटीक कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कुछ संभावनाएं प्रमुख हैं:

अनुवांशिक कारण (Genetic) – यदि परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो।

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की गलत स्थिति।

पोषण की कमी या फोलिक एसिड की कमी।

धूम्रपान या नशीले पदार्थों का सेवन।

गर्भाशय में बच्चे की मांसपेशियों और हड्डियों का असंतुलित विकास।



जानें कब शुरू करे इसका इलाज?

“इलाज जितना जल्दी शुरू किया जाए, उतना ही परिणाम बेहतर मिलता है। जन्म के 7 से 10 दिन के अंदर इलाज शुरू करना सबसे सही समय है।” — डॉ. एस.के. शर्मा


Club Foot का इलाज – पूरी प्रक्रिया

(1) Ponseti Technique – सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका

यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा अपनाई जाने वाली पद्धति है।

इसमें बच्चे के पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में मोड़ा जाता है और हर हफ्ते नया प्लास्टर (कास्ट) लगाया जाता है।

6–8 हफ्तों में पैर लगभग सीधा हो जाता है।

इसके बाद एक छोटी सर्जरी (Tenotomy) की जाती है जिसमें एड़ी की टेंडन को थोड़ा ढीला किया जाता है ताकि पैर सामान्य स्थिति में रहे।

इसके बाद बच्चे को ब्रेस (Brace) पहनाई जाती है ताकि पैर दोबारा न मुड़ सके।


(2) सर्जिकल इलाज (अगर केस पुराना या जटिल हो)


अगर बच्चे की उम्र ज्यादा हो जाए या पैर बहुत ज्यादा मुड़ा हुआ हो, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

इसमें हड्डियों, टेंडन और लिगामेंट्स को सही स्थिति में लाकर फिक्स किया जाता है।

फिर कुछ महीनों तक फिजियोथेरेपी और सपोर्ट बेल्ट की मदद से पैर को सामान्य बनाया जाता है।


इलाज के बाद कैसे रखें ख्याल?


डॉ. शर्मा बताते हैं —

“इलाज के बाद अगर नियमित फॉलोअप और देखभाल न की जाए, तो पैर फिर से मुड़ सकता है।”

इसलिए इन बातों का ध्यान रखें:

बच्चे को डॉक्टर द्वारा दी गई ब्रेस रोजाना पहनाएं।

खुद से पैर सीधा करने की कोशिश कभी न करें।

हर 3–6 महीने में डॉक्टर को दिखाएं।

फिजियोथेरेपी नियमित कराएं।

बच्चे को धीरे-धीरे चलने के अभ्यास कराएं, पर जबरदस्ती नहीं।



Club Foot से बचाव के उपाय (गर्भावस्था के दौरान)

गर्भवती महिला को फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम जरूर लेना चाहिए।

संतुलित आहार और प्रोटीन युक्त भोजन लें।

धूम्रपान, शराब और नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं।

गर्भावस्था में नियमित अल्ट्रासाउंड जांच कराते रहें।

डॉक्टर की सलाह पर योग और हल्की एक्सरसाइज करें।


डॉ. एस.के. शर्मा का संदेश माता-पिता के नाम

“क्लब फुट कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे बच्चे का भविष्य खत्म हो जाए। अगर समय पर इलाज हो जाए, तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। हमने सैकड़ों बच्चों को ऐसा इलाज दिया है जो अब बिल्कुल सामान्य जीवन जी रहे हैं।”



देवरिया के मरीजों के लिए राहत की खबर

देवरिया और आसपास के जिलों के मरीजों को अब लखनऊ या दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है।केजीएमयू के अनुभवी ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डॉ. एस.के. शर्मा अब देवरिया में ही प्रतिदिन मरीजों का इलाज कर रहे हैं। 


जाने डाक्टर एस के शर्मा के बैठने का स्थान!

न्यू कॉलोनी, गुरुद्वारा के पीछे, आईसीआईसीआई बैंक के पास, देवरिया

समय: प्रतिदिन सुबह 10 बजे से सायं 7 बजे तक!