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Bihar Election 2025: छपरा में खेसारी लाल यादव का सियासी इम्तिहान — क्या भोजपुरी स्टार तोड़ पाएंगे बीजेपी का किला?

 


रिपोर्ट: सत्य प्रकाश तिवारी 

न्यूज डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अब सबसे ज़्यादा चर्चित और हॉट सीट बन चुकी है छपरा विधानसभा सीट। यहां सियासी माहौल पूरी तरह से गरम है क्योंकि इस बार मैदान में उतर रहे हैं भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव, जिन्हें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने उम्मीदवार बनाया है। खेसारी लाल की लोकप्रियता और जनता से जुड़ाव को देखते हुए राजद ने उन्हें बीजेपी के मज़बूत गढ़ में एक बड़ी चुनौती के रूप में उतारा है। सवाल यह है कि क्या खेसारी लाल अपनी स्टार पावर से इस सीट पर भाजपा का किला भेद पाएंगे?


छपरा सीट: इस बार मुकाबला चतुष्कोणीय

2025 का चुनावी रण छपरा में बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। यहां इस बार मुकाबला चार प्रमुख चेहरों के बीच है —

राजद से खेसारी लाल यादव
भाजपा से छोटी कुमारी (वैश्य समाज)
जनसुराज पार्टी से पूर्व एडीजी जय प्रकाश सिंह
निर्दलीय प्रत्याशी राखी गुप्ता (पूर्व मेयर)

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस सीट पर वोटों का बिखराव निर्णायक भूमिका निभाएगा। राजद खेसारी की लोकप्रियता और अपने मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण के सहारे मैदान में है, जबकि बीजेपी अपने परंपरागत वैश्य वोट बैंक पर निर्भर है।



सारण का राजनीतिक परिदृश्य

सारण जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं — मांझी, एकमा, बनियापुर, तरैया, मढ़ौरा, छपरा, गरखा, अमनौर, परसा और सोनपुर।
इनमें से 7 सीटें महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-लेफ्ट) के पास हैं, जबकि 3 सीटें बीजेपी के पास हैं।

सारण के दो लोकसभा क्षेत्र —

  • सारण लोकसभा: राजीव प्रताप रूडी (भाजपा)
  • महाराजगंज लोकसभा: जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (भाजपा)

दोनों सीटों पर भाजपा का लगातार वर्चस्व रहा है। ऐसे में छपरा विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है।


जातीय समीकरण में दिलचस्पी

छपरा विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण काफी जटिल हैं —

जाति अनुमानित मतदाता संख्या
राजपूत 58,000
यादव 50,000
वैश्य 51,000
मुस्लिम 33,000
कोरी 22,000
रविदास 21,000
ब्राह्मण 14,000
कुर्मी 13,000
भूमिहार 9,000
पासवान 9,000

इनमें वैश्य और यादव मतदाता दोनों ही निर्णायक हैं।
जहां बीजेपी वैश्य मतदाताओं पर भरोसा करती आई है, वहीं आरजेडी यादव-मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने में लगी है।

 

बीजेपी में टिकट को लेकर असंतोष

पिछले दो बार से यहां के विधायक डॉ. सी. एन. गुप्ता (वैश्य समाज) थे। लेकिन उम्रदराज़ होने के कारण पार्टी ने इस बार टिकट छोटी कुमारी को दे दिया है।
इसी फैसले से असंतोष उभरा है।

भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व मेयर राखी गुप्ता, जिन्हें टिकट की उम्मीद थी, पार्टी से नाराज़ होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर आई हैं।
इससे भाजपा के वैश्य वोटों में बिखराव का खतरा बढ़ गया है।


खेसारी लाल यादव का सियासी डेब्यू

भोजपुरी सिनेमा के मेगा स्टार खेसारी लाल यादव का राजनीति में उतरना बिहार चुनाव की सबसे बड़ी खबर है।
उनका असली नाम शत्रुघ्न कुमार है और वे सिवान जिले के मूल निवासी हैं।
गरीब परिवार से निकलकर सुपरस्टार बनने की उनकी संघर्ष भरी कहानी उन्हें जनभावनाओं से जोड़ती है।

राजद उन्हें “गरीब और मेहनती बिहारी युवा” की छवि के रूप में पेश कर रही है।
खेसारी लाल खुद भी लोगों से कह रहे हैं —

“मैं स्टार नहीं, जनता का बेटा हूं। अब जनता के लिए लड़ाई लड़ने आया हूं।”

उनकी लोकप्रियता और युवाओं में प्रभाव भाजपा के लिए सिरदर्द बन गया है।



जनसुराज पार्टी का “ईमानदार अफसर” कार्ड

प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने इस सीट पर पूर्व एडीजी जय प्रकाश सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
वे पुलिस सेवा में अपनी सख्त और ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं।
जय प्रकाश सिंह जनता के बीच “साफ सियासत, नया बिहार” का संदेश लेकर निकले हैं।
उनकी उपस्थिति से मुकाबला त्रिकोणीय से चतुष्कोणीय हो गया है।


 छपरा का चुनावी इतिहास

  • 1957: कांग्रेस के राम प्रभुनाथ सिंह ने पहली बार यह सीट जीती थी।
  • 2020: भाजपा के डॉ. सी. एन. गुप्ता लगातार दूसरी बार विधायक बने।
  • 2025: यह चुनाव तय करेगा कि क्या बीजेपी अपना किला बचा पाती है या खेसारी की लहर नई कहानी लिखती है।
जनसंख्या और मतदान पैटर्न
  • कुल मतदाता (2024): 3,36,354
  • 2020 में मतदान प्रतिशत: 51.09%
  • हिंदू समुदाय: 81.45%
  • मुस्लिम समुदाय: 18.11%
  • साक्षरता दर: 81.30%
  • अनुसूचित जाति मतदाता: 11.14%

सारण में मुस्लिम और यादव मतदाताओं का समीकरण हमेशा से महागठबंधन के पक्ष में रहा है, जबकि वैश्य और राजपूत वोट बीजेपी को मजबूती देते हैं।


क्या खेसारी लाल बदलेंगे समीकरण?

खेसारी लाल यादव का राजनीतिक पदार्पण न सिर्फ एक स्टार का चुनावी प्रयोग है, बल्कि यह सेलिब्रिटी पॉलिटिक्स की परीक्षा भी है।
भोजपुरी फिल्मों में जिनकी लोकप्रियता करोड़ों में है, अब देखना यह होगा कि क्या वह वोटों में भी तब्दील हो पाती है या नहीं।

अगर खेसारी लाल छपरा जीतते हैं, तो यह राजद के लिए एक बड़ी प्रतीकात्मक जीत होगी और बिहार में नई पीढ़ी की राजनीति का संकेत भी।
लेकिन अगर बीजेपी अपनी सीट बरकरार रखती है, तो यह उसकी संगठनात्मक ताकत और जातीय पकड़ का प्रमाण होगा।



“छपरा की जंग” बनेगी बिहार की सबसे चर्चित सीट

छपरा का यह चुनाव न सिर्फ स्थानीय उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा से जुड़ा है, बल्कि यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में लोकप्रियता बनाम संगठन की लड़ाई में कौन भारी पड़ता है।
सियासी गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है —

 “क्या खेसारी लाल यादव सिनेमा के सुपरस्टार से राजनीति के सुपरस्टार बन पाएंगे?”

छपरा की जनता अब इस सवाल का जवाब 2025 के नतीजों में देगी।