ड्यूटी पर नहीं, निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की भीड़
जिले के कई पीएचसी और सीएचसी में यह आम शिकायत है कि डॉक्टर महीनों तक अस्पताल नहीं आते।
जहां सरकारी अस्पतालों में
- दवाएं हैं
- बेड हैं
- मशीनें हैं
लेकिन डॉक्टर गायब!
मरीजों को मजबूरन फार्मासिस्ट, कंपाउंडर या वार्ड बॉय के भरोसे इलाज करवाना पड़ता है।
और उधर वही डॉक्टर शहर व कस्बों में अपने निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक में हजार–पंद्रह सौ रुपए फीस लेकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने मना किया था प्राइवेट प्रैक्टिस, डॉक्टरों ने दिखाया ठेंगा
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कई बार साफ निर्देश दिए हैं:
✔ सरकारी सेवा में रहते हुए कोई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं करेगा
✔ निजी अस्पताल चलाना कानूनन अपराध
✔ पकड़े जाने पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई तय
लेकिन देवरिया में इन आदेशों की कोई परवाह नहीं।
डॉक्टर खुलकर बोर्ड लगा रहे हैं, क्लीनिक चला रहे हैं, रात-दिन मरीज देख रहे हैं।
दस्तावेजों में ड्यूटी पूरी, हकीकत में अस्पताल बंद
सबसे बड़ा सवाल:
- आखिर उपस्थिति रजिस्टर में इन डॉक्टरों की एंट्री कैसे हो रही है?
- क्या कोई और इनके स्थान पर फर्जी हाजिरी लगाता है?
- या CMO कार्यालय की शह है?
कई स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ नाम के लिए चल रहे हैं।
बायोमैट्रिक मशीन होने के बावजूद डॉक्टरों का कोई अता-पता नहीं मिलता।
CMO कार्यालय मौन, कार्यवाही शून्य
जब जिला स्वास्थ्य विभाग से पूछा जाता है, जवाब मिलता है—
“हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं। शिकायत मिलेगी तो जांच की जाएगी।”
लेकिन जनता पूछ रही है:
- क्या मीडिया या आम जनता शिकायत करेगी तभी कार्रवाई होगी?
- क्या CMO को जिले के डॉक्टरों की ड्यूटी नहीं पता?
यह चुप्पी सवाल खड़े करती है कि क्या मामला सिर्फ लापरवाही है या साठगांठ?
सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर, मरीजों की जिंदगी खतरे में
जहां डॉक्टर नहीं, वहां इलाज नहीं।
यह सीधा असर जिले की जनता पर पड़ रहा है:
प्रसव सेवाएं बाधित
आपातकालीन इलाज नहीं
टीकाकरण प्रभावित
ग्रामीण मरीजों को जबरन प्राइवेट अस्पताल भेजा जाता है
कई डॉक्टर सरकारी अस्पताल से मरीजों को अपने निजी क्लीनिक में भेजते हैं और वहां फीस लेकर इलाज करते हैं।
यानी सरकारी संसाधन भी, कमाई भी!
कानूनी रूप से क्या कार्रवाई हो सकती है?
सरकारी डॉक्टरों पर निम्न कार्रवाई तय है:
सेवा आचरण नियमों के तहत निलंबन
वेतन रोक
निजी क्लीनिक सील
धोखाधड़ी में एफआईआर
मरीजों से वसूली गई फीस की वसूली
लेकिन देवरिया में अब तक ऐसी किसी बड़ी कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं।
जनता का सवाल – आखिर कार्रवाई कब?
जिले की जनता अब सवाल कर रही है:
सरकारी वेतन लेने वाले डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक में क्यों बैठे हैं?
स्वास्थ्य विभाग की आंखों पर पट्टी क्यों बंधी है?
फर्जी हाजिरी कौन लगाता है?
क्या सरकार इस गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई करेगी?
अगर कार्रवाई हुई तो स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर सकती है
- डॉक्टर ड्यूटी पर आएंगे
- गरीबों को मुफ्त इलाज मिलेगा
- ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बहाल होंगी
- प्राइवेट अस्पतालों की लूट रुकेगी
स्वास्थ्य विभाग या मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुँचाने के कई आधिकारिक और प्रभावी तरीके हैं। नीचे आसान भाषा में पूरे कदम दिए गए हैं:
1. स्वास्थ्य विभाग को शिकायत कैसे करें
A) CMO / Chief Medical Officer कार्यालय
- अपने जिले के CMO कार्यालय में लिखित आवेदन दें।
- आवेदन में लिखें:
✅ आपका नाम, पता, मोबाइल नंबर
✅ किस डॉक्टर/अस्पताल के खिलाफ शिकायत है
✅ घटना की तारीख, जगह और पूरा विवरण
✅ प्रमाण (फोटो, वीडियो, बिल, रिपोर्ट) हों तो साथ लगाएँ - आवेदन की रसीद ज़रूर लें, ताकि बाद में कार्रवाई ट्रैक कर सकें।
- राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 104
- आयुष्मान भारत / सरकारी अस्पताल संबंधी शिकायत: 14555
- अपनी शिकायत दर्ज करवाकर कम्प्लेंट नंबर नोट करें।
➡️ Centralized Public Grievance Portal (CPGRAMS)
- वेबसाइट: https://pgportal.gov.in
- इसमें केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों की शिकायत दर्ज होती है।
- हर शिकायत को ट्रैक करने की सुविधा मिलती है।
A) मुख्यमंत्री कार्यालय की हेल्पलाइन
📞 UP CM हेल्पलाइन: 1076
- फोन करके पूरी शिकायत दर्ज करें
- आपको एक शिकायत नंबर दिया जाएगा
- 1–7 दिनों में सम्बंधित विभाग को कार्रवाई का आदेश जाता है
➡️ वेबसाइट: https://jansunwai.up.nic.in
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज
- फोटो/वीडियो/दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं
- शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं
- जिलाधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत जमा करें
- यदि सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस, लापरवाही या भ्रष्टाचार में शामिल हैं, DM तुरंत जांच के आदेश दे सकते हैं
- Twitter (X) पर:
✅ @CMOfficeUP
✅ @UPGovt
✅ @UPHealthDept - लिखें: घटना, स्थान, अधिकारी का नाम, वीडियो/पुरावा
- सोशल मीडिया शिकायतों पर अक्सर तुरंत कार्रवाई होती है
✔ लिखित शिकायत हमेशा प्रमाण के साथ दें
✔ घटना की तारीख, समय, जगह स्पष्ट लिखें
✔ गवाह या मोबाइल वीडियो हों तो और मजबूत मामला बनेगा
✔ शिकायत की रसीद/ट्रैकिंग नंबर जरूर रखें
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