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Deoria Accident News: एक ही परिवार की तीन महिलाओं का एक साथ उठा जनाज़ा, गांव में छाया मातम—पांच मासूमों से छिन गया मां का साया।

देवरिया। मऊ जनपद में हुए भयावह सड़क हादसे ने देवरिया के नवलपुर गांव को गहरे सदमे में डूबो दिया। गुरुवार की शाम हुए इस हादसे में एक ही परिवार की सास और दो बहुओं की मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। शुक्रवार की देर रात जैसे ही तीनों महिलाओं—60 वर्षीय मोहजबीन, 33 वर्षीय शाहिन और 30 वर्षीय नूरी—का जनाज़ा एक साथ उठा, ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। चारों ओर चीख-पुकार, मातम और गमगीन खामोशी का माहौल पसरा रहा। पूरे गांव में किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला।


शादी में शामिल होने गए थे, लौटे जनाज़े में

नवलपुर गांव के रफीक अहमद परिवार के साथ अपनी भांजी की बेटी की शादी में मऊ के पहाड़पुर गांव गए थे। साथ में उनकी पत्नी, दोनों बहुएं और पांच छोटे बच्चे भी थे। शादी की खुशियाँ मनाने गए इस परिवार पर उस वक्त कहर टूट पड़ा जब वे अपनी बीमार बहन से मिलने प्रेमपुर ई-रिक्शा से जा रहे थे। रास्ते में एक तेज रफ्तार बस ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी।

हादसा इतना भयावह था कि मोहजबीन, शाहिन और नूरी ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। बाकी सभी बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में इलाजरत हैं।



रात में गांव पहुंचा शव, कोहराम मच गया

देर रात जैसे ही तीनों शव गांव पहुंचे, माहौल मातम में बदल गया। घरों में चीत्कार, सड़क पर भीड़ और हर किसी की आंखों में आंसू। रफीक अहमद के बेटे तौमिन, जो पूना में रहते हैं, सूचना मिलते ही देर रात गांव पहुंचे। वहीं घायल बच्चों को अस्पताल में छोड़कर तौहिर और तौकीर भी अपने घर लौटे और अपनी पत्नियों के जनाज़े में शामिल हुए।


पांच मासूमों की किस्मत बदली—मां का साया छिन गया

इस हादसे में सबसे बड़ा आघात उन पांच मासूम बच्चों पर पड़ा, जिनकी उम्र डेढ़ साल से लेकर नौ साल तक है।
इन बच्चों—शाहिद (7), रोकइया (9), संवरिया (1.5), सुमैया (3) और नाबिया (1.5)—को क्या पता था कि शादी में जाते समय वे अपनी मां और दादी को हमेशा के लिए खो देंगे। गुरुवार को बरात आने से पहले ही उनकी दुनिया उजड़ गई।

यह संयोग ही था कि ई-रिक्शा में बैठा तौहिद अपनी चाची का फोन आने पर बीच रास्ते में उतर गया था, वरना शायद आज वह भी इस हादसे का शिकार होता।


अब कौन करेगा परवरिश?

परिवार में महिलाओं के न रहने से बच्चों की परवरिश को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दादा और पिता ही अब उनका एकमात्र सहारा हैं, लेकिन मां की ममता का कोई विकल्प नहीं।
फिलहाल सभी बच्चे मऊ के निजी अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। गांव के लोग, रिश्तेदार और परिचित सभी उनके स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।

गांव में पसरा मातम—हर कोई गम में डूबा

नवलपुर गांव में शुक्रवार को पूरे दिन सन्नाटा छाया रहा। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं—हर किसी की आंखों में दर्द और सदमे की झलक थी। चूल्हे नहीं जले, लोग उठे तो सिर्फ जनाज़े को कंधा देने के लिए।यह हादसा न केवल एक परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए गहरी त्रासदी बन गया है।