रिपोर्ट:सत्य प्रकाश तिवारी
देवरिया:आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घुटनों का दर्द (Knee Pain) एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है। यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक बैठने की आदत, गलत खान-पान, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता के कारण यह दर्द अब हर घर की कहानी बन गया है।केजीएमयू के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डॉक्टर एस. के. शर्मा का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो इस समस्या से बचाव और इलाज दोनों संभव हैं। वे बताते हैं कि “दर्द को सामान्य समझकर बार-बार दवाएं लेना खतरनाक हो सकता है। घुटनों का दर्द बढ़ने पर समय पर जांच और सही उपचार बेहद जरूरी है।”
घुटनों का दर्द — बढ़ती उम्र का नहीं, जीवनशैली का संकेत
डॉ. शर्मा बताते हैं कि घुटनों का दर्द केवल उम्र बढ़ने की वजह से नहीं होता, बल्कि गलत आदतें, पोषण की कमी और शरीर का वजन इसका प्रमुख कारण हैं।
आजकल 35 से 45 वर्ष की आयु के बीच के लोगों में भी घुटनों में दर्द, जकड़न और सूजन जैसी समस्याएँ देखने को मिल रही हैं। इसका मुख्य कारण है—
- ओस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis): यह एक आम बीमारी है जिसमें घुटनों के जोड़ की कार्टिलेज घिस जाती है।
- मोटापा: बढ़ा हुआ वजन सीधे घुटनों पर दबाव डालता है, जिससे जोड़ों में दर्द बढ़ता है।
- विटामिन डी और कैल्शियम की कमी: कमजोर हड्डियाँ आसानी से घिस जाती हैं।
- पुरानी चोटें या एक्सीडेंट: जोड़ों की चोट ठीक न होने पर बाद में दर्द स्थायी रूप ले लेता है।
- लंबे समय तक बैठकर काम करना: इससे जोड़ों की गतिशीलता कम होती है और मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं।
दर्द के शुरुआती लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें
- सुबह उठने पर घुटनों में अकड़न या दर्द
- चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने में तकलीफ
- लंबे समय तक खड़े रहने पर घुटनों में सूजन
- घुटनों को मोड़ने में कठिनाई
- घुटनों से चरचराहट या क्लिक की आवाज़
डॉ. शर्मा कहते हैं कि “जब भी ये लक्षण दिखने लगें तो तुरंत किसी विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। देर करने से जोड़ों का नुकसान स्थायी हो सकता है।”
बार-बार दर्दनिवारक दवाएँ लेना खतरनाक
लोग अक्सर दर्द को नजरअंदाज कर Painkillers (दर्द की दवाएँ) लेते रहते हैं। यह तरीका शरीर को अंदर से कमजोर बना देता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार —
“बार-बार दर्दनिवारक दवाओं का सेवन करने से लीवर, किडनी और दिल पर बुरा असर पड़ता है। इनसे केवल अस्थायी राहत मिलती है, स्थायी इलाज नहीं।”
वे बताते हैं कि दर्द को जड़ से खत्म करने के लिए पहले यह पता लगाना जरूरी है कि दर्द की असली वजह क्या है — हड्डियों का घिसना, नसों पर दबाव, या मांसपेशियों की कमजोरी।
इन आदतों को अपनाकर पा सकते हैं राहत
डॉ. शर्मा ने बताया कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर हम घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं:
वजन नियंत्रित रखें: मोटापा घुटनों पर सबसे ज्यादा दबाव डालता है।
नियमित व्यायाम करें: हल्की वॉक, योग और स्ट्रेचिंग से जोड़ों की लचीलापन बनी रहती है।
कैल्शियम और विटामिन डी युक्त भोजन लें: दूध, दही, पनीर, अंडा, हरी सब्जियाँ और धूप जरूरी हैं।
सही मुद्रा में बैठें: फर्श पर पालथी मारकर बैठना या घुटनों के बल झुकना नुकसानदेह है।
गर्म सिकाई और हल्की मालिश करें: इससे सूजन और जकड़न में राहत मिलती है।
उच्च एड़ी के जूते न पहनें: खासकर महिलाओं में यह दर्द बढ़ाने का बड़ा कारण है।
नी रिप्लेसमेंट — स्थायी राहत की आधुनिक तकनीक
जब सभी उपायों के बावजूद दर्द बढ़ जाए, तो टोटल नी रिप्लेसमेंट (Total Knee Replacement) एक बेहतरीन समाधान है।
डॉ. शर्मा के अनुसार —
“नी रिप्लेसमेंट सर्जरी आज बहुत सुरक्षित, दर्द रहित और अत्याधुनिक तकनीक से की जाती है। मरीज कुछ ही दिनों में चलने-फिरने लगते हैं और उनका जीवन फिर से सामान्य हो जाता है।”
नी रिप्लेसमेंट के फायदे:
- घुटनों के दर्द से स्थायी छुटकारा
- चलने, दौड़ने और सीढ़ियाँ चढ़ने में सहूलियत
- जकड़न और सूजन में कमी
- जीवन की गुणवत्ता और आत्मविश्वास में वृद्धि
- फिर से स्वतंत्र और सक्रिय जीवन
डॉ. शर्मा बताते हैं कि आज के आधुनिक Implant और Navigation System तकनीक से यह सर्जरी बेहद सटीक और लंबे समय तक टिकाऊ होती है। सही देखभाल से इसका असर 20 साल या उससे अधिक तक रहता है।
मरीजों की जिंदगी में आई खुशहाली
डॉ. शर्मा के अनुसार, “जिन मरीजों को चलना भी मुश्किल हो गया था, वे नी रिप्लेसमेंट के बाद अब बिना सहारे चल रहे हैं।”
कई बुजुर्ग जिन्होंने दर्द के कारण बाहर निकलना बंद कर दिया था, अब फिर से अपने पुराने जीवन का आनंद ले रहे हैं।
विशेषज्ञ की सलाह — दर्द को नजरअंदाज न करें
डॉ. शर्मा का संदेश है —
“घुटनों का दर्द कोई मामूली बात नहीं है। यह शरीर का अलार्म है कि आपकी हड्डियों को ध्यान और देखभाल की जरूरत है। जितनी जल्दी जांच करवा लेंगे, उतना आसान होगा इलाज।”
वे कहते हैं कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है। अगर शुरूआती चरण में ही डॉक्टर से सलाह ली जाए, तो सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती और केवल फिजियोथेरेपी व दवाओं से ही आराम मिल सकता है।
डॉ. एस. के. शर्मा — देवरिया के मरीजों के लिए बड़ी राहत
केजीएमयू लखनऊ के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा अब देवरिया में भी प्रतिदिन मरीजों को देख रहे हैं।
उनका क्लिनिक न्यू कॉलोनी, गुरुद्वारा के पीछे, आईसीआईसीआई बैंक के पास स्थित है। यहाँ मरीजों को घुटनों, रीढ़, जोड़ों, नसों और हड्डियों से जुड़ी सभी बीमारियों का इलाज विशेषज्ञ मार्गदर्शन में मिलता है।
घुटनों का दर्द अब उम्र की मजबूरी नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा से पूरी तरह ठीक होने वाली स्थिति है।
सही समय पर निदान, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और आवश्यकता पड़ने पर नी रिप्लेसमेंट — ये सभी उपाय व्यक्ति को फिर से दर्द-मुक्त और सक्रिय जीवन की ओर लौटाते हैं।
डॉ. शर्मा का संदेश:
“जिंदगी को घुटनों के दर्द में मत बाँधिए। समय पर जांच कराएँ, सही इलाज लें और फिर से खुलकर चलें, हँसें और जिएं।”



