देवरिया: आज के युवा जिस रफ्तार से काम, तनाव और असंतुलित जीवनशैली में उलझे हैं, उसी तेजी से उनकी हड्डियाँ कमजोर होती जा रही हैं। यह स्थिति आने वाले समय में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। केजीएमयू लखनऊ के प्रसिद्ध आर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉक्टर एस. के. शर्मा का कहना है कि “अब 25 से 35 वर्ष की उम्र के युवक-युवतियों में भी हड्डियों की मजबूती 60 साल के बुजुर्गों जैसी हो चुकी है, जो बेहद चिंता का विषय है।”
युवाओं में हड्डियों की कमजोरी का नया खतरा
डॉ. शर्मा बताते हैं कि पहले हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह युवाओं तक पहुंच चुकी है।
मुख्य कारण हैं —
- धूप की कमी:
आधुनिक जीवनशैली में धूप से दूर रहना आम हो गया है। दफ्तर, मोबाइल, लैपटॉप और एसी रूम में रहने से शरीर को पर्याप्त विटामिन D नहीं मिल पाता। - फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक:
जंक फूड, पैक्ड स्नैक्स और सोडा ड्रिंक्स शरीर में एसिडिटी बढ़ाते हैं, जिससे कैल्शियम हड्डियों से निकलकर पेशाब के रास्ते बाहर चला जाता है। - कैल्शियम युक्त आहार की कमी:
दूध, दही, पनीर और हरी सब्जियों का सेवन अब बहुत कम हो गया है। युवा प्रोटीन शेक और जिम सप्लीमेंट पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। - शारीरिक निष्क्रियता:
दिनभर बैठकर काम करने से हड्डियों पर लोड नहीं पड़ता, जिससे बोन डेंसिटी कम होती जाती है।
डॉ. एस. के. शर्मा के अनुसार, अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत हड्डियों की जांच करानी चाहिए—
- जोड़ों में दर्द या अकड़न
- मांसपेशियों में झनझनाहट या कमजोरी
- पीठ या गर्दन में लगातार दर्द
- चलने-फिरने में कठिनाई
- बार-बार हड्डी में फ्रैक्चर होना
- नींद न आना या थकावट
यह सभी संकेत हड्डियों में कैल्शियम और विटामिन D की कमी की ओर इशारा करते हैं।
डॉ. शर्मा द्वारा सुझाया गया हड्डी मजबूत करने वाला आहार
“हड्डियों को मजबूत करने के लिए सिर्फ दवा नहीं, संतुलित भोजन जरूरी है।” — डॉ. शर्मा
सुझाए गए खाद्य पदार्थ:
- दूध और डेयरी उत्पाद: दूध, दही, छाछ, पनीर आदि रोज लें।
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ: पालक, मेथी, सरसों, सहजन की पत्ती।
- सूखे मेवे: तिल, बादाम, अखरोट और काजू कैल्शियम व फॉस्फोरस से भरपूर हैं।
- अंकुरित अनाज: मूंग, चना, सोयाबीन।
- सी फूड और अंडा: विटामिन D के बेहतर स्रोत हैं।
- नारियल पानी और दही: पाचन ठीक रखते हैं जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण सही तरीके से हो पाता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार, शरीर को रोजाना 15-20 मिनट सुबह 8 से 10 बजे के बीच धूप देना सबसे आसान और असरदार उपाय है।
धूप से विटामिन D बनता है जो कैल्शियम को हड्डियों में जमाने में मदद करता है। सर्दियों में तो धूप को “प्राकृतिक दवा” कहा जा सकता है।
योग और व्यायाम से मिलेगी मजबूती
शरीर को गतिशील रखना हड्डियों के स्वास्थ्य का मूल मंत्र है।
डॉ. शर्मा द्वारा सुझाए गए व्यायाम:
- रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक
- सूर्य नमस्कार, ताड़ासन और त्रिकोणासन
- हल्की वेट ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज
- ध्यान और प्राणायाम से तनाव कम कर हड्डियों की स्थिति बेहतर होती है
अगर उम्र 25 से अधिक है और आप रोजाना कंप्यूटर या मोबाइल पर लंबे समय तक काम करते हैं, तो हर साल एक बार Bone Mineral Density (BMD) और विटामिन D व B12 टेस्ट कराना चाहिए।
इन जांचों से हड्डियों की ताकत और मिनरल की स्थिति का पता चलता है।
डॉ. शर्मा का कहना है — “रोकथाम ही इलाज है”
“हड्डियाँ उम्र से नहीं, लापरवाही से कमजोर होती हैं। अगर जीवनशैली सही रखी जाए तो 70 की उम्र में भी हड्डियाँ मजबूत रह सकती हैं।” — डॉ. एस. के. शर्मा
वे सलाह देते हैं:
- तंबाकू, शराब और कोल्ड ड्रिंक से दूरी बनाएं।
- पर्याप्त नींद लें।
- काम के बीच-बीच में शरीर को स्ट्रेच करें।
- कैल्शियम और विटामिन D की खुराक डॉक्टर की सलाह से ही लें।
देवरिया के “बोन, जॉइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर” में डॉ. एस. के. शर्मा हर महीने निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करते हैं।
इसमें—
- BMD टेस्ट, विटामिन D व B12 जांच,
- घुटना, जोड़ व स्पाइन रोगों की जांच की जाती है।
इन शिविरों में सैकड़ों मरीज अपनी जांच करवाते हैं और सही इलाज से लाभान्वित होते हैं।
डॉ. शर्मा का उद्देश्य है —
“हर उम्र में मजबूत हड्डियाँ, स्वस्थ जोड़ और दर्दमुक्त रीढ़ की हड्डी।”
डॉ. शर्मा का संदेश
“हड्डियाँ शरीर का ढांचा हैं, इन्हें मजबूत रखना हमारी जिम्मेदारी है। अगर आज से सावधानी नहीं बरती, तो कल साधारण चोट से भी हड्डियाँ टूट सकती हैं।”



