देवरिया: भलुवनी गांव में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तीसरे दिन का आयोजन अत्यंत भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ। इस दिन कथा प्रवक्ता श्री कृष्णकांता जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का दिव्य प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर वहां उपस्थित माताएं और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा स्थल पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम के विवाह की महिमा में डूबे हुए दिखे, और पूरा वातावरण भक्ति के रस में सराबोर हो गया।
भगवान राम का शिवधनुष भंजन एवं परशुराम का क्रोध
श्री कृष्णकांता जी महाराज ने बताया कि जब भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से शिवधनुष को उठाया और देखते ही देखते उसे भंग कर दिया, तब पूरे जनकपुर में हर्ष की लहर दौड़ गई। सभी देवता और ऋषि-मुनि जयघोष करने लगे। जनकपुरवासी आनंद से झूम उठे, लेकिन तभी वहाँ भगवान परशुराम का आगमन हुआ।
भगवान परशुराम ने जैसे ही शिवधनुष के भंग होने का समाचार सुना, उनका क्रोध भड़क उठा। उन्होंने इसे अपने आराध्य भगवान शंकर का अपमान समझा और अत्यंत रोष में बोले –
"कौन ऐसा अभिमानी पुरुष है, जिसने मेरे प्रभु शंकर के धनुष को तोड़ने का साहस किया?"
परशुराम का भयंकर रूप देखकर सभा में सन्नाटा छा गया। लेकिन तभी लक्ष्मण जी ने दृढ़ता के साथ उत्तर दिया –
"हे भगवन्! जो धनुष पुराना और जर्जर हो चुका था, वह अपने समय पर टूट गया, इसमें इतना क्रोध करने की क्या आवश्यकता है?"
लक्ष्मण के वचनों से परशुराम का क्रोध और अधिक बढ़ गया, और वे लक्ष्मण पर क्रोधित हो उठे। लेकिन तभी भगवान श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता से परशुराम जी को शांत किया और अपनी दिव्यता प्रकट की। जब परशुराम ने भगवान श्रीराम की वास्तविकता को पहचाना, तब उन्होंने प्रभु को प्रणाम कर आशीर्वाद दिया और वहां से प्रस्थान किया।
माता सीता का रूप एवं विवाह का भव्य आयोजन
इसके बाद कथा में माता सीता के विवाह का मनोहर दृश्य प्रस्तुत किया गया। श्री कृष्ण कांत जी महाराज ने माता सीता के अनुपम सौंदर्य, उनकी भव्यता और सोलह श्रृंगार का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि –
"माता सीता लाल रेशमी वस्त्रों में सजी हुई थीं, उनके सुगंधित केशों में मोरपंख और फूलों का गजरा सुशोभित हो रहा था। उनके माथे पर चमकता हुआ स्वर्ण मुकुट और चमचमाते आभूषण उनकी दिव्यता को बढ़ा रहे थे। वे इतनी सुंदर लग रही थीं कि देवतागण भी उनके दर्शन के लिए आतुर हो उठे।"
जब माता सीता ने भगवान श्रीराम को वरमाला पहनाई, तो समस्त देवताओं ने पुष्पवर्षा की और पूरे जनकपुर में आनंद की लहर दौड़ गई। उपस्थित श्रद्धालुओं को यह प्रसंग मानो साक्षात् सजीव प्रतीत हो रहा था।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भक्ति में डूबे भक्त
यज्ञ सचिव अमित तिवारी भार्गव ने कहा कि श्रद्धालु दूर-दूर से 'जियर जी स्वामी' का आशीर्वाद प्राप्त करने आ रहे हैं। महायज्ञ में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह महायज्ञ 22 मार्च को पूर्णाहुति और भंडारे के साथ संपन्न होगा।
श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के माध्यम से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया है। श्रद्धालु इस दिव्य कथा के श्रवण से आत्मिक शांति और भक्ति का अनुभव कर रहे हैं।
विशिष्ट जनों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के विशिष्ट जन सहित उपेंद्र तिवारी, धर्मेंद्र कुमार पाण्डेय, रोशन तिवारी, गोलू तिवारी, ज्ञान प्रकाश तिवारी, प्रकाश तिवारी, मोनू बाबा, आदित्य मिश्रा, त्रिपुरेश तिवारी, सुधाकर तिवारी, रामसेवक यादव, घनश्याम यादव, प्रमोद कुमार, शुभम् तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, आनंद तिवारी, शिवदयाल तिवारी, धर्मेंद्र चौरसिया, कमलेश चौरसिया, दीपक यादव और बड़ी संख्या में भक्तगण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने इस दिव्य कथा का आनंद लिया।

