रिपोर्ट: सत्य प्रकाश तिवारी
देवरिया। जिले के जाने-माने आर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा ने एक बार फिर अपने अनुभव और कुशलता का परिचय देते हुए घुटने के गंभीर घायल मरीज का एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (ACL) रिकंस्ट्रक्शन सफलतापूर्वक किया। इस ऑपरेशन के बाद मरीज के जीवन में फिर से चलने-फिरने और खेलों में भाग लेने का रास्ता खुल गया है।
कैसे लगी चोट
दरअसल आपको बताते चले कि देवरिया के रहने वाले युवक सागर विश्वकर्मा उम्र 23 वर्ष जो कि खेलकूद में काफी सक्रिय था, एक स्थानीय टूर्नामेंट के दौरान अचानक गिर पड़ा। गिरते समय उसका घुटना जोर से मुड़ गया, जिससे ACL लिगामेंट पूरी तरह फट गया। जिसके बाद सागर के परिजन उसे लखनऊ गोरखपुर जैसे बड़े शहरों में कई चिकित्सकों से दिखाया लेकिन कोई फायदा नही हुआ परिजन सागर को लेकर लगभग डेढ़ साल से परेशान थे!
डॉ. शर्मा का निर्णय और सर्जरी प्रक्रिया
मरीज सागर को देवरिया के मशहूर आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा के पास लाया गया। एमआरआई रिपोर्ट में एसीएल के पूरी तरह फटने की पुष्टि हुई। डॉ. शर्मा ने परिवार से चर्चा के बाद आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी तकनीक से एसीएल रिकंस्ट्रक्शन करने का निर्णय लिया।
ऑपरेशन के दौरान:
फटे लिगामेंट को सावधानीपूर्वक हटाया गया
मरीज के ही शरीर से (ऑटोग्राफ्ट) नया टेंडन लेकर उसे पुराने लिगामेंट की जगह प्रत्यारोपित किया गया
बोन टनल बनाकर टेंडन को सही जगह फिट किया गया और विशेष स्क्रू से मजबूती दी गई
पूरी प्रक्रिया लगभग डेढ़ घंटे में पूरी हो गई।
सर्जरी के बाद का परिणाम
ऑपरेशन के 24 घंटे बाद मरीज को हल्की फिजियोथेरेपी शुरू कराई जाएगी। उसके अब मरीज बिना सहारे के चल पाएगा और 6–8 महीने के भीतर पूरी तरह स्वस्थ होकर खेलों में वापसी की संभावना है।
डॉ. शर्मा का कहना
डॉ. शर्मा ने कहा, "ACL की चोट को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर सही तकनीक से इलाज करने पर मरीज फिर से पूरी तरह स्वस्थ होकर खेलों और सामान्य जीवन में लौट सकता है। देर होने पर घुटने में स्थायी नुकसान हो सकता है।"
परिवार और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
मरीज के परिजनों ने डॉ. शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि उनकी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक से युवक को नई जिंदगी मिली है। स्थानीय लोगों ने भी इस सफलता को लेकर डॉ. शर्मा की खूब सराहना की।
ACL रिकंस्ट्रक्शन क्या है?
एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (ACL) घुटने के अंदर का एक मजबूत ऊतक होता है, जो चलने, दौड़ने और कूदने के दौरान घुटने को स्थिर रखता है। खेल या एक्सीडेंट के दौरान अचानक मोड़ने, गिरने या टक्कर लगने से यह फट सकता है। यदि यह पूरी तरह फट जाए तो सर्जरी के जरिए इसे बदला जाता है, जिसे एसीएल रिकंस्ट्रक्शन कहते हैं।