हेल्थ डेस्क: शरीर की हर गतिविधि हमारे मस्तिष्क और नसों के नेटवर्क से जुड़ी होती है। जब यह नेटवर्क व्यवस्थित तरीके से कार्य करता है, तो हम चल सकते हैं, दौड़ सकते हैं, बैठ सकते हैं, और कई घंटों तक बिना थके काम कर सकते हैं। लेकिन जब शरीर में कहीं भी यह सिस्टम बाधित होता है—विशेषकर पैरों में सुन्नपन और ब्लड सर्कुलेशन रुकने की समस्या आती है—तो यह सामान्य जीवनशैली को गहराई से प्रभावित करता है।
देवरिया के प्रसिद्ध हड्डी एवं स्पाइन रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. के. शर्मा ने इस विषय पर गहन जानकारी दी है, जिसे हम विस्तार से इस रिपोर्ट में आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
शरीर में रक्त संचार का विज्ञान
मानव शरीर में हृदय (Heart) एक पंप की तरह कार्य करता है। यह दिन-रात बिना थके रक्त को पूरे शरीर में भेजता है। रक्त न केवल ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है, बल्कि विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालता है। जब रक्त का प्रवाह किसी अंग में बाधित होता है, तो वहां सुन्नपन, ठंडक, नीला पड़ना या दर्द महसूस होता है।
विशेष रूप से पैरों में रक्त संचार की रुकावट का संबंध मुख्यतः नसों और धमनियों से होता है।
पैरों में सुन्नपन के प्रमुख कारण
डॉ. एस. के. शर्मा के अनुसार, इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
1. साइटिका (Sciatica):
साइटिका वह अवस्था है जब साइएटिक नर्व में दबाव आता है, जो कि रीढ़ की निचली हड्डी से निकलकर पैरों तक जाती है। यह दबाव स्लिप डिस्क, मांसपेशियों की ऐंठन या हड्डी की बढ़त से हो सकता है।
लक्षण:
- एक पैर में तीव्र दर्द
- सुन्नपन या जलन
- उठने-बैठने में कठिनाई
2. ब्लड क्लॉट (खून का थक्का):
यदि किसी रक्त नली में थक्का बन जाता है तो ब्लड फ्लो रुक जाता है। यह गंभीर स्थिति होती है जिसे डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) कहते हैं।
लक्षण:
- अचानक सूजन
- लालिमा
- दर्द और गर्माहट
3. डायबिटिक न्यूरोपैथी:
डायबिटीज मरीजों में रक्त में ग्लूकोज का उच्च स्तर नसों को नुकसान पहुंचाता है।
लक्षण:
- झनझनाहट
- जलन
- पैर में चींटियों जैसा महसूस होना
4. स्पाइन से जुड़ी बीमारियाँ:
जैसे स्लिप डिस्क, स्पोंडिलोसिस, या लंबर स्टेनोसिस। इनमें रीढ़ की हड्डी की नसें दब जाती हैं।
5. विटामिन की कमी:
विशेषकर विटामिन B12 और विटामिन D की कमी नसों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
6. लंबे समय तक बैठना / गलत पोस्चर:
ऑफिस वर्क या ड्राइविंग जैसी नौकरियों में घंटों एक ही मुद्रा में बैठना भी एक कारण है।
जानें मरीजों के अनुभव
केस स्टडी 1: "पैर में सुन्नपन से पैरालिसिस की कगार तक पहुंचा था"
श्रीमती उर्मिला देवी (52 वर्ष), देवरिया जिले के बरहज क्षेत्र की निवासी हैं। वे एक स्कूल टीचर थीं और लंबे समय तक खड़े होकर पढ़ाने के कारण उनके पैरों में झनझनाहट शुरू हुई। शुरुआत में इसे अनदेखा किया गया, लेकिन बाद में यह इतनी बढ़ गई कि वे चल भी नहीं पाती थीं। MRI रिपोर्ट से पता चला कि उन्हें साइटिका है।
डॉ. एस. के. शर्मा की सर्जरी व फिजियोथेरेपी से अब वे सामान्य जीवन जी रही हैं।
केस स्टडी 2: "डायबिटीज के कारण नसें हो गई थीं कमजोर"
देवरिया के ही एक व्यवसायी को लगातार पैरों में जलन और सुन्नपन की शिकायत थी। जांच से पता चला कि यह डायबिटिक न्यूरोपैथी है। डॉ. शर्मा के अनुसार, ब्लड शुगर पर नियंत्रण और न्यूरोविटामिन्स के कोर्स से उन्हें काफी राहत मिली।
जानें क्या है जांच और उपचार की प्रक्रिया
कौन-कौन सी जांच जरूरी होती है?
- MRI / CT-Scan – रीढ़ की हड्डी और नसों की स्थिति देखने के लिए
- BMD टेस्ट – हड्डियों की घनता जांचने के लिए
- ब्लड टेस्ट – डायबिटीज, B12, D3 की स्थिति जानने के लिए
- डॉप्लर स्कैन – ब्लड सर्कुलेशन की स्थिति देखने के लिए
उपचार की विधियां:
🩺 दवाओं से इलाज:
- विटामिन सप्लीमेंट
- एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं
- न्यूरोप्रोटेक्टिव मेडिसिन
🧘 फिजियोथेरेपी:
- स्पाइन एक्सरसाइज
- मसल स्ट्रेचिंग
- इलेक्ट्रोथेरेपी
🛏️ जीवनशैली में बदलाव:
- व्यायाम करना
- वजन कम करना
- डायबिटीज कंट्रोल में रखना
🧠 न्यूरो-सर्जरी:
- जब दर्द असहनीय हो और दवाएं बेअसर हो जाएं
🧠 अध्याय 5: मानसिक स्वास्थ्य पर असर
जब कोई व्यक्ति लम्बे समय तक चलने, दौड़ने या उठने-बैठने में असमर्थ हो जाता है, तो इसका असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी होता है। ऐसे मरीजों में डिप्रेशन, चिंता और आत्मग्लानि की भावना देखी गई है।
डॉ. शर्मा सलाह देते हैं कि परिवार और समाज का सहयोग इस स्थिति में अत्यंत आवश्यक है।
देवरिया में इलाज की स्थिति
देवरिया बोन, ज्वाइंट एंड स्पाइन केयर सेंटर, डॉ. एस. के. शर्मा के नेतृत्व में एक ऐसी जगह बन चुकी है जहां न केवल देवरिया, बल्कि बिहार और पूर्वांचल से भी मरीज इलाज कराने आते हैं।
जानें कब दिखाये चिकित्सक को?
डॉ. शर्मा चेतावनी देते हैं कि अगर निम्न लक्षण हों तो देरी न करें:
- एक पैर अचानक ठंडा हो जाए
- चलने में गिरने लगे
- सुन्नपन धीरे-धीरे कमर से ऊपर की ओर बढ़े
- पेशाब/मल त्याग में परेशानी
डॉ. एस. के. शर्मा की सलाह स्पष्ट है:
"पैरों में सुन्नपन को नजरअंदाज करना आत्मघाती हो सकता है। जैसे ही संकेत मिलें, जांच कराएं, और जरूरत हो तो तुरंत इलाज शुरू करें।"