रिपोर्ट:सत्य प्रकाश तिवारी
देवरिया: हड्डियां हमारे शरीर का सहारा और मजबूती की बुनियाद हैं, लेकिन समय, खान-पान की लापरवाही और जीवनशैली में बदलाव इन्हें कमजोर कर सकता है। देवरिया के मशहूर ऑर्थो-स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा का कहना है कि आजकल ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस और पैगेट रोग जैसे हड्डी के गंभीर रोग तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। ये बीमारियां न सिर्फ जीवन की गुणवत्ता घटाती हैं, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी विकलांगता तक का कारण बन सकती हैं।
1. ऑस्टियोपोरोसिस – चुपचाप हड्डियों को खोखला करने वाली बीमारी
डॉ. शर्मा बताते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस को "Silent Disease" कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण लगभग न के बराबर होते हैं।
- लक्षण: मामूली चोट में फ्रैक्चर, पीठ में झुकाव, कद कम होना, कमर में लगातार दर्द।
- मुख्य कारण:
- कैल्शियम, विटामिन D और विटामिन B12 की कमी।
- महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव।
- लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन।
- धूम्रपान और शराब की आदत।
- बचाव और इलाज:
- रोजाना धूप में 20-30 मिनट बिताना।
- दूध, पनीर, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, मछली का सेवन।
- नियमित हड्डी घनत्व (Bone Density) टेस्ट कराना।
- जरूरत पड़ने पर कैल्शियम व विटामिन D सप्लीमेंट लेना।
यह बीमारी खासकर घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी में ज्यादा देखने को मिलती है।
- लक्षण:
- सुबह उठते समय या लंबे समय तक बैठने के बाद जोड़ों में जकड़न।
- चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर दर्द और सूजन।
- जोड़ों में खटखट की आवाज।
- मुख्य कारण:
- बढ़ती उम्र और शरीर का ज्यादा वजन।
- जोड़ों की पुरानी चोट।
- आनुवंशिक कारण।
- बचाव और इलाज:
- वजन नियंत्रित रखना और रोजाना हल्की एक्सरसाइज/योग करना।
- हाई हील्स से बचना।
- फिजियोथेरेपी और दवाओं से सूजन व दर्द नियंत्रित करना।
- गंभीर मामलों में घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) जैसे ऑपरेशन।
डॉ. शर्मा बताते हैं कि यह बीमारी भारत में कम लेकिन खतरनाक है।
- लक्षण:
- हड्डियों का मोटा और टेढ़ा होना।
- बार-बार फ्रैक्चर होना।
- सुनने की क्षमता में कमी (अगर खोपड़ी प्रभावित हो)।
- मुख्य कारण:
- आनुवंशिक प्रवृत्ति।
- वायरल इंफेक्शन के कुछ केस।
- बचाव और इलाज:
- एक्स-रे और बोन स्कैन से शुरुआती पहचान।
- हड्डी की वृद्धि नियंत्रित करने वाली दवाएं।
- जरूरत पड़ने पर सर्जरी।
- संतुलित आहार: रोजाना कैल्शियम, विटामिन D और विटामिन B12 युक्त भोजन।
- नियमित व्यायाम: वॉक, योग, स्ट्रेचिंग और वेट ट्रेनिंग।
- खराब आदतों से बचाव: धूम्रपान, अत्यधिक शराब, जंक फूड कम करना।
- चेकअप: 40 साल के बाद हड्डी घनत्व की जांच हर 2 साल में कराएं।
डॉ. शर्मा का कहना है —
"हड्डियों की बीमारियां एक बार गंभीर रूप ले लें, तो पूरी तरह ठीक होना मुश्किल होता है। लेकिन अच्छी आदतों, सही खान-पान और समय पर इलाज से इन्हें रोका जा सकता है। हड्डी में दर्द, अकड़न या बार-बार चोट लगने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।"