रिपोर्ट:सत्य प्रकाश तिवारी
हेल्थ डेस्क: आज के समय में पीठ दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियां बहुत आम हो चुकी हैं। गलत लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठने की आदत, भारी वजन उठाना, मोटापा, और उम्र बढ़ने के साथ डिस्क का घिसना — ये सभी कारण रीढ़ की सेहत को प्रभावित करते हैं। जब दवा, फिजियोथेरेपी और अन्य नॉन-सर्जिकल तरीकों से फायदा नहीं मिलता, तो मरीज सर्जरी का सहारा लेते हैं।
लेकिन, हर बार सर्जरी सफलता की गारंटी नहीं होती। कई मरीजों में सर्जरी के बाद भी दर्द बना रहता है या पहले से भी बढ़ जाता है। इसी स्थिति को मेडिकल भाषा में Failed Back Surgery Syndrome (FBSS) या Failed Back Syndrome (FBS) कहा जाता है।
जानें क्या है Failed Back Syndrome?
Failed Back Syndrome कोई एकल बीमारी नहीं, बल्कि एक पोस्ट-सर्जिकल कंडीशन है, जहां मरीज की रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बावजूद वांछित परिणाम नहीं मिलते। इसका मतलब है कि या तो दर्द बिल्कुल खत्म नहीं होता, या कुछ समय बाद वापस आ जाता है।
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स के आंकड़ों के अनुसार, स्पाइन सर्जरी के बाद 10% से 40% मरीजों में किसी न किसी स्तर पर दर्द दोबारा लौट आता है।
यह समस्या क्यों होती है? (मुख्य कारण)
Failed Back Syndrome के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है:
(a) गलत डायग्नोसिस
- यदि सर्जरी से पहले दर्द का वास्तविक कारण पहचान नहीं पाया गया, तो ऑपरेशन के बाद भी समस्या बनी रह सकती है।
- उदाहरण: अगर दर्द का स्रोत हिप जॉइंट में है, लेकिन सर्जरी स्पाइन पर की गई, तो दर्द खत्म नहीं होगा।
(b) स्कार टिशू (Fibrosis)
- सर्जरी के बाद घाव भरने की प्रक्रिया में नर्व के आसपास स्कार टिशू बन सकता है, जो नर्व पर दबाव डालकर फिर से दर्द पैदा करता है।
(c) रीढ़ की अस्थिरता (Instability)
- ऑपरेशन के बाद अगर स्पाइन के हड्डियों का बैलेंस सही से नहीं बनता, तो मरीज को अस्थिरता और दर्द महसूस हो सकता है।
(d) नई जगह पर डिस्क हर्निएशन
- सर्जरी के बाद पास के किसी और हिस्से में डिस्क हर्निएशन हो जाना भी आम कारण है।
(e) मसल्स वीकनेस और रीहैब की कमी
- ऑपरेशन के बाद अगर सही फिजियोथेरेपी और मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज नहीं की गई, तो रीढ़ पर फिर से लोड बढ़ सकता है।
(f) ऑपरेशन के दौरान जटिलताएं
- सर्जरी में नर्व डैमेज, इन्फेक्शन या ब्लीडिंग भी आगे चलकर FBS का कारण बन सकते हैं।
- लक्षण (Symptoms)
Failed Back Syndrome के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:
- लगातार पीठ दर्द जो सर्जरी से पहले था, वैसा ही रहना।
- पैरों में फैलता हुआ दर्द (sciatica)।
- पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी।
- लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने पर दर्द का बढ़ना।
- झुकने या वजन उठाने में कठिनाई।
- कई बार दर्द का पैटर्न बदल जाना — जैसे पहले सिर्फ पीठ में दर्द था, लेकिन सर्जरी के बाद पैरों में भी होने लगना।
4. डायग्नोसिस कैसे किया जाता है?
डॉक्टर सर्जरी के बाद भी बने दर्द की जांच कई तरीकों से करते हैं:
- MRI (Magnetic Resonance Imaging): रीढ़ की संरचना, डिस्क और नर्व की स्थिति देखने के लिए।
- CT Scan: हड्डियों और स्क्रू/इम्प्लांट की स्थिति जानने के लिए।
- X-ray: स्पाइन के मूवमेंट और अलाइनमेंट का आकलन।
- Nerve conduction studies: नर्व डैमेज या पिंचिंग की जांच।
- Pain mapping: यह पता लगाने के लिए कि दर्द का वास्तविक स्रोत कहां है।
5. इलाज (Treatment)
Failed Back Syndrome का इलाज कई चरणों में किया जाता है, और हर मरीज के लिए अलग योजना बनाई जाती है:
(a) नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट
- दवाएं: दर्द निवारक, मसल रिलैक्सेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स।
- फिजियोथेरेपी: कोर मसल्स को मजबूत करने वाले व्यायाम।
- नर्व ब्लॉक इंजेक्शन: दर्द पैदा करने वाले नर्व को अस्थायी तौर पर ब्लॉक करना।
- Spinal Cord Stimulation (SCS): रीढ़ में एक डिवाइस लगाकर नर्व सिग्नल्स को मॉड्यूलेट करना।
(b) सर्जिकल ट्रीटमेंट
- तभी जब MRI/CT में नया और स्पष्ट कारण मिले।
- इसमें री-सर्जरी, स्कार टिशू हटाना, या स्पाइन का स्टेबलाइजेशन शामिल हो सकता है।
(c) लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन
- सही बैठने और खड़े होने की आदत।
- वजन नियंत्रित रखना।
- रोजाना स्ट्रेचिंग और मसल स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज।
6. बचाव (Prevention)
- सर्जरी से पहले दूसरी राय (Second Opinion) लेना।
- दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए पूरी जांच कराना।
- शुरुआती स्टेज में नॉन-सर्जिकल उपचार अपनाना।
- ऑपरेशन के बाद नियमित फिजियोथेरेपी करना।
- भारी वजन उठाने और गलत posture से बचना।
7. मरीजों की कहानियां (Case Studies)
केस 1: देवरिया के रमेश गुप्ता
रमेश गुप्ता (45 वर्ष) को दो साल पहले डिस्क हर्निएशन की सर्जरी हुई थी। शुरुआती 3 महीने सब ठीक रहा, लेकिन उसके बाद फिर से पैरों में दर्द शुरू हो गया। MRI में पता चला कि पास के दूसरे डिस्क में हर्निएशन हो गया है। अब वे फिजियोथेरेपी और स्पाइनल स्टिम्युलेशन से राहत पा रहे हैं।
केस 2: गोरखपुर की सीमा वर्मा
सीमा वर्मा (52 वर्ष) को लगातार कमर दर्द के लिए सर्जरी कराई गई। ऑपरेशन के बाद भी दर्द में कोई खास फर्क नहीं आया। बाद में पता चला कि उनका दर्द असल में हिप जॉइंट आर्थराइटिस से था, स्पाइन से नहीं। अब वे सही डायग्नोसिस के बाद हिप रिप्लेसमेंट के लिए तैयार हैं।
8. विशेषज्ञ की राय
देवरिया के मशहूर आर्थो-स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा कहते हैं:
"हर पीठ दर्द का समाधान सर्जरी नहीं होता। कई बार सही फिजियोथेरेपी, पोस्टचर सुधार, और वजन नियंत्रित रखने से ही मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। सर्जरी तभी करनी चाहिए जब दर्द का कारण पूरी तरह स्पष्ट हो और नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट फेल हो चुके हों।"