नई दिल्ली, — सोमवार को राजधानी में बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और "वोट चोरी" के आरोपों के विरोध में विपक्षी INDIA ब्लॉक ने संसद से भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मुख्यालय तक मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें परिवहन भवन के पास ही रोक दिया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पुलिस बैरिकेड कूदकर सड़क पर धरना दिया, जबकि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, महुआ मोइत्रा और अन्य सांसदों ने बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाजी की।
पुलिस की रोक, विपक्ष का विरोध
पुलिस का कहना था कि इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। चुनाव आयोग ने केवल 30 सांसदों को मिलने की अनुमति दी थी, लेकिन विपक्षी दल सभी सांसदों के सामूहिक रूप से जाने पर अड़े रहे। संयुक्त पुलिस आयुक्त दीपक पुरोहित ने बताया कि बिना अनुमति बड़ी संख्या में आगे बढ़ने की कोशिश करने पर नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
अखिलेश यादव बैरिकेड कूदे, सड़क पर बैठे
जैसे ही पुलिस ने मार्च को रोका, अखिलेश यादव बैरिकेड के ऊपर से कूद गए और अन्य नेताओं के साथ बीच सड़क पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।
महिला सांसद भी बैरिकेड पर चढ़ीं
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव और कांग्रेस सांसद संजना जाटव तथा ज्योतिमणि भी बैरिकेड पर चढ़कर नारे लगाने लगीं। प्रदर्शनकारी सांसदों के बैनर पर लिखा था—"श्रीमान + वोट चोरी = लोकतंत्र की हत्या"।
विपक्ष के आरोप और बयान
- राहुल गांधी: "यह लड़ाई राजनीतिक नहीं, संविधान और एक व्यक्ति-एक वोट के लिए है। हम साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहते हैं।"
- प्रियंका गांधी: "सरकार डरपोक है, हम सच्चाई से पीछे नहीं हटेंगे।"
- जयराम रमेश: "चुनाव आयोग अब ‘चुराओ आयोग’ बन गया है, सामूहिक रूप से दस्तावेज देने की अनुमति नहीं दी।"
- शशि थरूर: "मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए खतरा है, आयोग को पारदर्शिता दिखानी चाहिए।"
- मल्लिकार्जुन खरगे: "सभी दलों से 30 सांसद चुनना संभव नहीं, सरकार डर रही है।"
प्रदर्शन में अफरा-तफरी
विरोध के दौरान टीएमसी सांसद मिताली बाग और कांग्रेस सांसद संजना जाटव की तबीयत बिगड़ गई। मिताली बाग को मौके पर संभाला गया, जबकि संजना जाटव को आरएमएल अस्पताल ले जाया गया।
एसआईआर पर विवाद
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इसका उद्देश्य चुनाव से पहले मतदाताओं को सूची से हटाना है। वे इसे "वोट चोरी" की साजिश बता रहे हैं। संसद में 21 जुलाई से मानसून सत्र की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है और विधायी कामकाज लगभग ठप है।