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Deoria News: भीषण गर्मी में हड्डी रोगियों पर दोहरी मार, बढ़ रहा दर्द, कमजोरी और फ्रैक्चर का खतरा, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. एस. के. शर्मा ने बताए बचाव के कारगर उपाय

रिपोर्टर:सत्य प्रकाश तिवारी 

देवरिया/उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हड्डी और जोड़ों के मरीजों पर देखने को मिल रहा है। तेज धूप, बढ़ता तापमान और लू के कारण शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) तेजी से हो रही है, जिससे हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं गंभीर रूप ले रही हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में इन दिनों जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और फ्रैक्चर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में शरीर के अंदर मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे हड्डियों की मजबूती प्रभावित होती है। खासकर बुजुर्गों और पहले से हड्डी रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।


देवरिया के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा ने बताया कि “गर्मी के मौसम में शरीर तेजी से पानी और जरूरी लवण खो देता है। इससे हड्डियों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है। कई बार मरीजों को अचानक तेज दर्द, कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत होती है, जिससे गिरने और फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ जाता है।”


डिहाइड्रेशन बना सबसे बड़ा कारण

गर्मी में सबसे बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन की होती है। शरीर में पानी की कमी होने पर कैल्शियम, पोटैशियम और सोडियम जैसे जरूरी तत्व असंतुलित हो जाते हैं। इसका असर सीधे हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है।

डॉ. शर्मा के अनुसार, “अगर शरीर में पर्याप्त पानी नहीं रहेगा, तो मांसपेशियां जल्दी थकेंगी और जोड़ों में जकड़न बढ़ेगी। इससे दर्द और अकड़न की समस्या बढ़ जाती है।”


 बढ़ रहा है जोड़ों और कमर दर्द

गर्मी में पसीना ज्यादा निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। यही कारण है कि इन दिनों कमर दर्द, घुटनों का दर्द और सर्वाइकल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।


विशेषज्ञ बताते हैं कि जो लोग लंबे समय तक एसी में रहते हैं और अचानक तेज धूप में निकलते हैं, उनके शरीर पर इसका दोगुना असर पड़ता है।


बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरा

बुजुर्गों में हड्डियां पहले से ही कमजोर होती हैं। ऐसे में गर्मी का असर उन पर ज्यादा पड़ता है। चक्कर आना, कमजोरी और संतुलन बिगड़ने के कारण गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

डॉ. शर्मा ने चेतावनी दी कि “60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। घर के अंदर भी फिसलन से बचाव और सहारे का उपयोग जरूरी है।”




विटामिन और पोषण की कमी भी बड़ी वजह

गर्मी में लोग अक्सर हल्का भोजन लेते हैं, लेकिन कई बार पोषण की अनदेखी कर देते हैं। इससे शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञों के अनुसार, दूध, दही, हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन जरूरी है।


एक्सरसाइज में लापरवाही से बढ़ती समस्या

गर्मी के कारण लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। वहीं कुछ लोग अचानक ज्यादा एक्सरसाइज कर लेते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।


डॉ. शर्मा सलाह देते हैं कि “सुबह या शाम के समय हल्की एक्सरसाइज और वॉक करना सबसे बेहतर विकल्प है।”



किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

जोड़ों में लगातार दर्द

मांसपेशियों में खिंचाव

चक्कर आना या कमजोरी

चलने में असंतुलन

अचानक गिरना या चोट लगना

इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।


बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

डॉ. एस. के. शर्मा ने हड्डी रोगियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए—

दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं

दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें

कैल्शियम और विटामिन D युक्त भोजन लें

नियमित हल्की एक्सरसाइज करें

ढीले और हल्के कपड़े पहनें

घर में फिसलन से बचाव के उपाय करें

डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां न लें




लापरवाही पड़ सकती है भारी

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी को हल्के में लेना हड्डी रोगियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी समस्या में बदल सकती है। खासकर जिन लोगों को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस, गठिया या स्पाइन से जुड़ी बीमारी है, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।



भीषण गर्मी का प्रभाव सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि शरीर के अंदर तक पड़ता है। हड्डी और जोड़ों के मरीजों के लिए यह मौसम एक चुनौती की तरह है। ऐसे में सही खानपान, पर्याप्त पानी, संतुलित दिनचर्या और विशेषज्ञों की सलाह ही उन्हें इस कठिन समय में सुरक्षित रख सकती है।