लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: अगर आप यह सोचते हैं कि रोजाना या कभी-कभार ली गई थोड़ी-सी शराब से कोई नुकसान नहीं होता, तो यह खबर आपको सतर्क कर देगी। एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने साफ कर दिया है कि शराब की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं है। चाहे महंगी विदेशी व्हिस्की हो, बीयर हो या गांव-कस्बों में मिलने वाली देसी दारू—रोजाना सिर्फ एक पेग भी मुंह के कैंसर के खतरे को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है।
‘एक पेग से कुछ नहीं होता’—स्टडी ने तोड़ा भ्रम
शोध में सामने आया है कि भारतीय पुरुषों में रोजाना 9 ग्राम शराब (जो लगभग एक स्टैंडर्ड ड्रिंक के बराबर है) का सेवन करने से बकल म्यूकोसा कैंसर यानी गाल के अंदरूनी हिस्से के कैंसर का खतरा करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। यह वही मात्रा है जिसे आमतौर पर लोग “सेफ लिमिट” मानते हैं, लेकिन यह धारणा अब गलत साबित हो चुकी है।
11 साल की रिसर्च, 6 कैंसर सेंटर, हजारों मरीज
यह अध्ययन 2010 से 2021 के बीच भारत के छह प्रमुख कैंसर केंद्रों में किया गया।
1,803 पुरुष ऐसे थे, जिन्हें बकल म्यूकोसा कैंसर का पता चला
1,903 पुरुष ऐसे थे, जिन्हें कैंसर नहीं था
इन दोनों समूहों की शराब पीने की आदतों, मात्रा और प्रकार का विस्तार से विश्लेषण किया गया। स्टडी में बीयर और व्हिस्की जैसी विदेशी शराब के साथ-साथ देसी दारू, ठर्रा और महुआ जैसी स्थानीय शराबों को भी शामिल किया गया।
महिलाओं में शराब सेवन की दर कम होने के कारण यह अध्ययन मुख्य रूप से पुरुषों पर केंद्रित रहा।
कम पीना भी नहीं है सुरक्षित
तंबाकू और अन्य जोखिम कारकों को अलग रखने के बाद भी नतीजे चौंकाने वाले रहे।
शराब पीने वाले पुरुषों में
शराब न पीने वालों की तुलना में
मुंह के कैंसर का खतरा 68% ज्यादा पाया गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जो लोग एक स्टैंडर्ड ड्रिंक से भी कम शराब पीते थे, उनमें भी कैंसर का खतरा स्पष्ट रूप से बढ़ा हुआ था। इससे यह साबित हो गया कि शराब सेवन की कोई सुरक्षित सीमा तय नहीं की जा सकती।
देसी शराब सबसे ज्यादा घातक
स्टडी के अनुसार, स्थानीय रूप से बनी देसी शराब सबसे अधिक खतरनाक साबित हुई।
देसी दारू और ठर्रा पीने वालों में
मुंह के कैंसर का खतरा
लगभग दोगुना पाया गया।
शोधकर्ताओं का मानना है कि बिना क्वालिटी कंट्रोल के बनने वाली देसी शराब में मौजूद हानिकारक तत्व कैंसर के खतरे को और बढ़ा देते हैं। हालांकि, बीयर और व्हिस्की भी सुरक्षित नहीं हैं—कम मात्रा में पीने वालों में भी जोखिम बना रहता है।
शराब और तंबाकू का खतरनाक मेल
अध्ययन में शराब और तंबाकू के बीच गहरा संबंध सामने आया है।
जो लोग शराब के साथ तंबाकू चबाते या पीते हैं,
उनमें कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
अनुमान के मुताबिक, भारत में 60% से ज्यादा बकल म्यूकोसा कैंसर के मामले शराब और चबाने वाले तंबाकू के संयुक्त सेवन से जुड़े हैं। वहीं, करीब 11.3% मामले केवल शराब के कारण होते हैं।
भारत में तेजी से फैल रहा बकल म्यूकोसा कैंसर
बकल म्यूकोसा कैंसर भारत में मुंह के कैंसर का सबसे आम प्रकार बन चुका है।
इस बीमारी में मरीज के 5 साल तक जीवित रहने की संभावना केवल 43% है
चिंता की बात यह है कि कई मरीज 45 साल से कम उम्र के पाए गए
यह संकेत देता है कि कम उम्र में शुरू हुई शराब की आदत भविष्य में गंभीर और जानलेवा परिणाम ला सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस अध्ययन के लेखक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि:
शराब और तंबाकू की रोकथाम के लिए एक साथ सख्त नीतियां बनाई जानी चाहिए
बिना मानकों के बिकने वाली देसी शराब पर कड़े नियम लागू हों
आम लोगों को यह साफ संदेश दिया जाए कि
“शराब की कोई भी मात्रा सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है।”
महंगी व्हिस्की हो या देसी दारू—
रोज का एक पेग भी सेहत के लिए खतरे की घंटी है।
अगर आप मुंह के कैंसर जैसे गंभीर खतरे से बचना चाहते हैं, तो शराब से दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा फैसला है।
