देवरिया: जनसेवा और मानवता की भावना जब चिकित्सा से जुड़ती है, तो समाज में ऐसे ही भावुक और प्रेरणादायक दृश्य सामने आते हैं। देवरिया जनपद के औरा चौरी गांव में आयोजित एक विशाल नि:शुल्क चिकित्सा शिविर के दौरान कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति का मन छू लिया।
इस शिविर में देवरिया के प्रसिद्ध आर्थो एवं स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा ने सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों का नि:शुल्क परीक्षण, परामर्श और उपचार किया। दूर-दराज के गांवों से आए मरीजों में बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल रहे। घुटनों के दर्द, कमर की समस्या, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियां, जोड़ों का दर्द और चलने-फिरने में हो रही परेशानियों से जूझ रहे मरीजों को डॉ. शर्मा ने न केवल चिकित्सकीय सलाह दी, बल्कि उन्हें बीमारी से डरने के बजाय सही इलाज और नियमित देखभाल का भरोसा भी दिलाया।
बुजुर्ग महिला का स्नेह बना शिविर का सबसे भावुक पल
शिविर के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा और रिश्ते का रूप दे दिया। इलाज कराने पहुंची एक बुजुर्ग महिला मरीज ने डॉ. एस. के. शर्मा को अपने बेटे की तरह प्यार और दुलार दिया। उन्होंने भावुक होकर डॉक्टर के सिर पर हाथ फेरा, आशीर्वाद दिया और कहा कि “आज मुझे अपने बेटे की कमी महसूस नहीं हो रही।”
यह भावुक पल कैमरे में कैद हो गया, जिसे देखकर हर किसी का मन खुश हो गया। मौके पर मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे और डॉ. शर्मा की सेवा भावना की सराहना करते नजर आए।
सैकड़ों मरीजों को मिला लाभ
इस नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में सैकड़ों मरीजों की जांच की गई। कई मरीज ऐसे थे जो आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पतालों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। ऐसे लोगों के लिए यह शिविर किसी वरदान से कम नहीं रहा। मरीजों को आवश्यक दवाइयों की जानकारी दी गई और गंभीर मामलों में आगे के इलाज के लिए मार्गदर्शन भी किया गया।
डॉ. एस. के. शर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी हड्डी और रीढ़ की बीमारियों को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है। समय पर जांच और सही इलाज से इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
ग्रामीणों ने जताया आभार
शिविर के समापन पर गांव के लोगों और समाजसेवियों ने डॉ. एस. के. शर्मा का स्वागत किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे डॉक्टर बहुत कम होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के गांव-गांव जाकर लोगों की सेवा करते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
और चौरी गांव में आयोजित यह चिकित्सा शिविर न सिर्फ इलाज का माध्यम बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि डॉक्टर जब सेवा को धर्म बना लेते हैं, तो वे मरीजों के लिए भगवान से कम नहीं होते। बुजुर्ग महिला और डॉ. शर्मा के बीच का यह भावुक रिश्ता आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
निस्संदेह, यह शिविर और उसमें कैद हुआ वह स्नेह भरा पल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो यह सिखाता है कि इंसानियत, सेवा और संवेदना ही सबसे बड़ा इलाज है।

