देवरिया: घुटनों का दर्द आज केवल बुजुर्गों की ही नहीं, बल्कि युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों की भी बड़ी समस्या बन चुका है। बदलती जीवनशैली, मोटापा, गलत खानपान, लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण घुटनों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि घुटनों के तेज दर्द का मतलब ऑपरेशन ही अंतिम रास्ता है, लेकिन केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक व स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा इससे बिल्कुल अलग राय रखते हैं। उनका कहना है कि हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती, सही समय पर सही इलाज से बिना ऑपरेशन भी घुटनों का दर्द काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
घुटनो के दर्द के बढ़ते मामले
डॉ. एस. के. शर्मा के अनुसार अस्पतालों में आने वाले मरीजों में घुटनों के दर्द के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं।
ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी घुटनों की हड्डियों का घिसना
ACL, PCL और मेनिस्कस जैसी लिगामेंट की चोट
कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी
अधिक वजन
गलत बैठने-उठने की आदतें और भारतीय शैली में जमीन पर बैठना
इन कारणों से घुटनों की कार्टिलेज कमजोर हो जाती है, जिससे चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने और बैठने में असहनीय दर्द होने लगता है।
डॉ. शर्मा बताते हैं कि घुटनों के दर्द का इलाज मरीज की उम्र, दर्द की गंभीरता और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाता है। शुरुआती और मध्यम स्तर के मरीजों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे मामलों में आधुनिक कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट काफी कारगर साबित हो रहा है।
1. इंजेक्शन थैरेपी
घुटनों में दिए जाने वाले हायल्यूरोनिक एसिड और पीआरपी (PRP) इंजेक्शन से जोड़ की चिकनाहट बढ़ती है। इससे दर्द और सूजन में कमी आती है और मरीज को चलने-फिरने में राहत मिलती है।
2. फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज
डॉ. शर्मा के अनुसार सही एक्सरसाइज से घुटनों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मजबूत मांसपेशियां घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर देती हैं, जिससे दर्द धीरे-धीरे घटता है।
3. दवाइयां और सप्लीमेंट्स
सूजन कम करने वाली दवाइयों के साथ कैल्शियम, विटामिन-डी और कार्टिलेज सपोर्ट करने वाले सप्लीमेंट्स भी इलाज में अहम भूमिका निभाते हैं।
4. वजन नियंत्रण
डॉ. शर्मा बताते हैं कि अगर कोई मरीज अपना वजन 5 से 10 प्रतिशत तक भी कम कर ले, तो घुटनों के दर्द में काफी राहत मिल सकती है।
5. नी-ब्रेस और सपोर्ट
घुटनों के लिए विशेष सपोर्ट बेल्ट या नी-ब्रेस पहनने से चलने के दौरान घुटनों को सहारा मिलता है और दर्द कम होता है।
किन मरीजों को सर्जरी से बचना चाहिए
डॉ. एस. के. शर्मा के मुताबिक जिन मरीजों में घुटनों का दर्द शुरुआती या मध्यम स्तर का है, या जिनमें एक्सरसाइज और दवाइयों से सुधार दिख रहा है, उन्हें जल्दबाजी में ऑपरेशन नहीं कराना चाहिए। सही सलाह और नियमित इलाज से ऐसे मरीज लंबे समय तक सर्जरी से बच सकते हैं।
कब जरूरी हो जाती है सर्जरी
हालांकि डॉ. शर्मा यह भी स्पष्ट करते हैं कि कुछ मामलों में सर्जरी जरूरी हो जाती है।
जब दर्द असहनीय हो जाए
चलना-फिरना लगभग नामुमकिन हो जाए
एक्स-रे या एमआरआई में गंभीर क्षति दिखे
बिना सर्जरी के इलाज से कोई फायदा न हो
ऐसे मामलों में ही घुटने के ऑपरेशन पर विचार किया जाता है।
मरीजों के लिए डॉ. शर्मा की खास सलाह
घुटनों के दर्द को नजरअंदाज न करें
समय पर डॉक्टर से जांच कराएं
सीढ़ियां उतरते समय सावधानी बरतें
जमीन पर बैठने और उकड़ूं बैठने से बचें
रोजाना बताई गई एक्सरसाइज जरूर करें
केजीएमयू के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक व स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के चलते अब घुटनों का दर्द हमेशा ऑपरेशन का नाम नहीं है। सही समय पर सही इलाज अपनाकर बिना सर्जरी भी घुटनों के दर्द से राहत पाई जा सकती है। जरूरत है तो बस जागरूकता और सही चिकित्सकीय सलाह की।


