देवरिया: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हाथ-पैरों में दर्द, उठने-बैठने में परेशानी, थकान और कमजोरी को लोग अक्सर सामान्य समझकर टाल देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर मस्कुलर कमजोरी (Muscular Weakness) और मायोसाइटिस (Myositis) जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकते हैं। केजीएमयू से जुड़े वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. एस. के. शर्मा ने इन बीमारियों के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।
क्या है मस्कुलर कमजोरी?
मस्कुलर कमजोरी ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां अपनी सामान्य ताकत खो देती हैं। इस कारण व्यक्ति को रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होने लगती है।
डॉ. एस. के. शर्मा बताते हैं कि मस्कुलर कमजोरी कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई कारणों से पैदा होने वाली समस्या है।
मस्कुलर कमजोरी के प्रमुख कारण
शरीर में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन D व B12 की कमी
लंबे समय तक शारीरिक मेहनत या व्यायाम न करना
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का कमजोर होना
रीढ़ की हड्डी या नसों से जुड़ी समस्याएं
डायबिटीज, थायरॉइड और अन्य हार्मोनल रोग
कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन
क्या है मायोसाइटिस?
मायोसाइटिस मांसपेशियों में सूजन (Inflammation) से जुड़ी बीमारी है। इसमें शरीर की मांसपेशियों में लगातार दर्द, सूजन और कमजोरी बढ़ती जाती है। कई मामलों में यह एक ऑटोइम्यून रोग होता है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपनी ही मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाने लगती है।
मायोसाइटिस के प्रमुख प्रकार
डॉ. शर्मा के अनुसार मायोसाइटिस मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है—
पॉलीमायोसाइटिस – जिसमें शरीर की कई मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं।
डर्माटोमायोसाइटिस – इसमें मांसपेशियों की कमजोरी के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते और रैशेज़ भी दिखाई देते हैं।
इन्क्लूजन बॉडी मायोसाइटिस – यह अधिकतर बुजुर्गों में पाई जाती है और इसका असर हाथ-पैरों की मांसपेशियों पर ज्यादा पड़ता है।
मायोसाइटिस के लक्षण
मायोसाइटिस के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं, जिनमें—
हाथ, पैर, कंधे और जांघों में लगातार दर्द
मांसपेशियों में जकड़न और सूजन
चलने, सीढ़ियां चढ़ने या बैठने-उठने में कठिनाई
जल्दी थक जाना
कुछ मामलों में बुखार और वजन कम होना
डॉ. एस. के. शर्मा का कहना है कि यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो इसे सामान्य दर्द समझकर न टालें।
जांच और इलाज की प्रक्रिया
इन बीमारियों की सही पहचान के लिए डॉक्टर द्वारा—
खून की जांच
एमआरआई
ईएमजी (EMG) टेस्ट
जरूरत पड़ने पर मसल बायोप्सी
की सलाह दी जाती है।
इलाज में रोग की गंभीरता के अनुसार दवाइयां, फिजियोथेरेपी और नियमित फॉलो-अप शामिल होता है। समय पर इलाज शुरू होने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
बचाव के उपाय: डॉक्टर एस. के. शर्मा की खास सलाह
डॉ. शर्मा के अनुसार सही जीवनशैली अपनाकर इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है—
संतुलित आहार लें: भोजन में प्रोटीन, दालें, दूध, दही, हरी सब्जियां और फल शामिल करें।
नियमित व्यायाम करें: योग, स्ट्रेचिंग और रोज़ाना टहलना मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
धूप में समय बिताएं: विटामिन D की पूर्ति के लिए रोज़ाना धूप लें।
गलत पोस्चर से बचें: लंबे समय तक झुककर बैठना या मोबाइल देखने से बचें।
समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं।
समय पर इलाज है सबसे जरूरी
डॉ. एस. के. शर्मा ने लोगों से अपील की कि मांसपेशियों में लगातार दर्द और कमजोरी को नजरअंदाज न करें। शुरुआती लक्षणों में ही विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेने पर बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
मस्कुलर कमजोरी और मायोसाइटिस धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देने वाली गंभीर बीमारियां हैं। सही जानकारी, संतुलित जीवनशैली और अनुभवी डॉक्टर की सलाह से इनसे बचाव और इलाज दोनों संभव हैं। जागरूक रहकर ही स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाया जा सकता है।

